जालोर में दर्दनाक हादसा: स्कूल में ब्लैक बोर्ड गिरने से 6 साल की छात्रा की मौत, संचालक फरार!

Edited By Payal Choudhary, Updated: 20 Feb, 2026 07:43 PM

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राजस्थान के जालोर जिले में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। सायला थाना क्षेत्र के बावतरा गांव स्थित एक निजी स्कूल में शुक्रवार दोपहर करीब 3:30 बजे 6 वर्षीय छात्रा की ब्लैक बोर्ड गिरने से मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद स्कूल...

राजस्थान के जालोर जिले में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। सायला थाना क्षेत्र के बावतरा गांव स्थित एक निजी स्कूल में शुक्रवार दोपहर करीब 3:30 बजे 6 वर्षीय छात्रा की ब्लैक बोर्ड गिरने से मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद स्कूल संचालक फरार हो गए हैं, जबकि पुलिस और शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

मृतका छात्रा की पहचान प्रीति (6) के रूप में हुई है, जो सेकेंड क्लास की छात्रा थी। घटना के समय वह अन्य बच्चों के साथ कक्षा कक्ष में खेल रही थी। इसी दौरान अचानक दीवार पर बनाया गया ईंटों का ब्लैक बोर्ड ढहकर उसके ऊपर गिर पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ब्लैक बोर्ड ईंटों से बना हुआ था और ठीक से मजबूत नहीं किया गया था।

ऐसे हुआ हादसा

स्थानीय लोगों के मुताबिक, स्कूल के कमरे अस्थायी और असुरक्षित तरीके से बनाए गए थे। सीमेंट की ईंटों की 5 से 7 फीट ऊंची दीवार खड़ी कर उस पर बांस की बल्लियां लगाकर तिरपाल से ढक दिया गया था। पढ़ाने के लिए दीवार पर ईंटों का ही ब्लैक बोर्ड बनाया गया था। कक्षा कक्ष पूरी तरह से मजबूत निर्माण मानकों पर खरा नहीं उतरता था।

हादसे के दौरान जब ब्लैक बोर्ड गिरा, तो प्रीति ईंटों के नीचे दब गई। स्कूल स्टाफ और स्थानीय लोगों ने तुरंत उसे बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए।

12वीं तक संचालित होता है स्कूल

ग्रामीणों के अनुसार, मरूधर शिक्षण संस्था नाम से यह स्कूल करीब 5-6 साल पहले शुरू किया गया था। स्कूल के संचालक कपूरगिरी और दिनेश गिरी बताए जा रहे हैं। दोनों ने जमीन खरीदकर स्कूल भवन का निर्माण कराया था। यहां 12वीं कक्षा तक पढ़ाई होती है और करीब 350 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं।

बताया जा रहा है कि स्कूल में 10×10 और 10×15 फीट के कई कमरे बनाए गए हैं। इन कमरों की दीवारें सीमेंट की ईंटों से खड़ी की गई हैं, जबकि छत के नाम पर बांस की बल्लियों के सहारे तिरपाल डाला गया है। भवन की मजबूती और सुरक्षा को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।

परिवार की स्थिति

प्रीति का परिवार मूल रूप से बालोतरा जिले के असाड़ा गांव का रहने वाला है। उसके पिता भवरलाल मेघवाल जालोर जिले के असाणा गांव में खेत ठेके पर लेकर खेती का काम करते हैं और परिवार के साथ वहीं रहते हैं। घटना के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

संचालक फरार, जांच शुरू

सायला थाने के एएसआई महिपाल सिंह ने बताया कि हादसे के बाद स्कूल के दोनों संचालक फरार हैं। फिलहाल परिजनों की ओर से मामला दर्ज नहीं कराया गया है, लेकिन पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश जारी है। जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

शिक्षा विभाग ने बनाई जांच कमेटी

जिला शिक्षा अधिकारी भंवरलाल ने बताया कि स्कूल को पूर्व में मान्यता मिली हुई थी और यह दूसरा भवन बनाया गया था। विज्ञान विषय की मान्यता के लिए फाइल लंबित है। हादसे के बाद रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय को भेज दी गई है और एक जांच कमेटी गठित की गई है। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना निजी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या बच्चों की सुरक्षा के मानकों की नियमित जांच होती है? क्या मान्यता देने से पहले भवन की गुणवत्ता की सख्ती से जांच की जाती है? इस हादसे ने इन सभी सवालों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

 

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